आज न जाने क्यों मन कर रहा है की कुछ लिखू किंतु जब लिखने बैठी तो कोई भी विषय ही नही सूझ रहा था। थोडी देर आँखें बंद की तो प्रिषा (मेरी बेटी) का ही चेहरा सामने आ गया और मै स्वयं में ही इठलाने को मजबूर हो गयी की आह ! ऐसा भी क्या है मुझमें जो प्रिशी ने मुझे अपनी माँ के रूप में चुना? आज उसे देख देख के मेरा ख़ुद का बचपन ही कई बार सामने चला आता है
बच्चे अपने साथ खुशियों का खजाना लेके आते हैं माता पिता को देने के लिए। प्यार का आनंद प्यार करने में है प्यार पाने में नही। हम जब अपने बचों को प्यार देते हैं, उनकी तकलीफों को दूर कर उन्हें खुश देखते तो अपनी ज़िन्दगी की अनमोल खुशियों हासिल करते हैं। हमारे बच्चों ने हमारे घर जनम लेकर हमें प्यार करने का सुख देकर काफ़ी कुछ दे दिया है। उस से अधिक कीमती प्रतिफल हमें क्या मिल सकता है ......
किन्तु इन सभी बातों को भूलते हुए हम फिर से उम्मीदों का पेड़ खड़ा करने लगते हैं, केवल एक सवाल के साथ इति करना चाहूंगी की क्या मैं या आप भी उनमें से ही एक तो नही होते जा रहे हैं?
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अच्छी लिखती हो | लिखते रहना |
ReplyDeleteNice one!!! I really loved reading your blog keep posting us your nice thoughts, will be looking forward to read them. Take care.
ReplyDeletereally heart touching truth, u shud keep writing - inspiration for me! tc
ReplyDeleteIMPRESSING LILS.
ReplyDeleteits really very nice. This is only one example of selfless love in the entire world. I have no experince of this feeling but would be inspiration for others. so, keep writing.
ReplyDeleteKya arz kiya hain, sahin mein likne mein bahut gharaiye hain..............toh yeh naya shokh yunhi barkaraar rahein.............Keep Writing !!!
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